कितने भोले…

आँसू ……तुम हो कितने भोले…

बात हो मन की…. बोल अबोले

नर्म धूप-से कोसे कोसे

गुप-चुप बैठे नैन झरोखे!!!

 

बात….बात-बिन बेबस बहते

रोते-गाते एक ही सुर में

समझे ना कोई अर्थ तुम्हारे

फिर भी अपनी कहते रहते!!!

कोमल हो कर भी चुभते हो

आँख-राख करते रोकूं तो

पी लूँ तो बन जाओ शक्ति

मरहम हो जो बहने दूँ तो !!!

 

गहन हो…. मेरा गहना भी हो

साहस संय्यम सहना भी हो

भेस भेंट का आए लेकर

जानूं तुमसे… रब है भीतर!!!

जानूं तुमसे… रब है भीतर!!!

kitne bhole

2 Comments

  1. Deepak Srivastava 09/10/2013
    • Anju Varma 10/10/2013

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