गुलमोहर…….

तुम मौसम की सौगात लिए

आते हो प्रणय आभास लिए

सजती धरती दुल्हनिया-सी

आते हो पुष्प-बारात लिए

 

तुम राग हो या हो रंग कोई..

झरना हो या चुप-चाप  नदी…

अम्बर को समेटे हो स्वयं में …

या विस्तृत हो उस जैसे ही ??

क्या रूप तुम्हे दूँ गुलमोहर

कैसे वर्णित कर पाऊँ मैं

गीतों की झालर में गूंधूं

या फिर अलकें महकाऊँ मैं

कर लूँ जीवन को इक बगिया

तुम से…तुम-सी खिल जाऊं मैं

प्रिय को गुलमोहर कह दूँ…..

या

प्रिय नाम से तुम्हें बुलाऊं मैं ???

प्रिय नाम से तुम्हें बुलाऊं मैं ???

 

……….अंजु वर्मा

गुलमोहर

 

6 Comments

  1. yashodadigvijay4 12/09/2013
    • Anju Varma 12/09/2013
  2. Dr Jai 20/09/2013
    • Anju Varma 21/09/2013
  3. Gurcharan Mehta 29/09/2013

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