हम सोचते हैं

वो नजरें कैसे मिलायेंगे उस रब से हम सोचते हैं,
मेरा दिल तोड कर वो कैसे नया जहां बसायेंगे हम सोचते हैं !!

तमन्ना आसमां को छूने की कैसे पूरी होगी, किसी की रेत मे मिलाकर हम सोचते हैं,
जो वादे तोड गये वो कैसे निभायेंगे हम सोचते हैं !!

मन्जिल उन्हे मिलेगी कैसे, जो दूसरों की राहों के कांटे हो हम सोचते हैं,
सफर उनका पूरा होगा कैसे जो हमसफर को भूले है हम सोचते हैं !!

भरोसा शब्द ही गलत है इसे रचने वाला कौन है हम सोचते हैं,
दिल एक है फिर टुकडे अनेक क्यों है हम सोचते हैं !!

3 Comments

  1. SUHANATA SHIKAN 02/08/2013
  2. Gurcharan Mehta 02/08/2013
  3. Sunil 23/01/2014

Leave a Reply