याद आया

 

हम तो कब के भुल चुके थे
जब दर्द हुवा तो याद आया
खोज रहे थे अतित मे उनको
जब नशा चडा तो याद आया
खुश्बु भी उनकी भुल चुका था
जब गुलाब देखा तो याद आया
क्या नाम था उनका सोच रहा था
जब जाम भरा तो याद आया
शराब शबाब व गजलें कि रातें
जब घुङ्गुरु बजी तो याद आया
जन्नत कि हुर जमी पे देखा था
जब चाँद निकला तो याद आया
सपनो मे बुलाना मै भी चाहता था
जब निंद टुटा तो याद आया
गुफ़्त्गु होजाये दिल कि अरमा थि
जब रुख्सत हुवा तब याद आया
हम भी देखो अजिब इन्सा हैं
सब भुल गया था अब याद आया
जिन्दा है बस उस दर्द सहने को
बर्दास्त न हुवा तो याद आया
हरि पौडेल
नेदरल्याण्डस

3 Comments

  1. Muskaan 28/07/2013
    • Paudel 30/07/2013
    • Paudel 07/03/2014

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