न जाने क्यो …

न जाने क्यो दिल की सुन कर पछ्ताये हम,
न जाने क्यो हंसने के बदले रोये हम !!

जब चुना था मन का रस्ता, फिर क्यों नही मिला मन्जिल का पता,
चाहा किसी को खुद से ज्यादा, फिर क्यो हो गये वो हमसे ही लापता !!
फूलों की कामना की, कांटों का दामन मिला,
प्यार ही बांटा सदा, पर दर्द का सिलसिला मिला !!

पर कहना है इतना नही टूटे हैं, न टूटेंगे कभी हम,
जिन्दगी भी हमें गम दे कर थक जाये इतना मुस्कुरायेंगे हम !!
न जाने क्यो …

सोचा तो है ये की हर पत्थर को रास्ते का साथी बना लेंगे ,
रोक ही नही पायेंगे वो जब उसे हम तराश देंगे !!
आखों के आन्सुओं को बहने से रोक लेंगे,
ये मोती अनमोल है इन्हें शब्दों का रूप देंगे !!
तेरी दी हुई यादों से सीख कर नया जहां बसायेंगे,
ना रुकने को कहा तुमने तब, तो अब हम उड्ते ही जायेंगे !!

वो पंख जो रोक लिये थे तेरी खातिर अब खुल के फेलायेंगे हम,
जिन्दगी भी हमें गम दे कर थक जाये इतना मुस्कुरायेंगे हम !!
न जाने क्यो …

3 Comments

  1. Gurcharan Mehta 27/07/2013
  2. SUHANATA SHIKAN 27/07/2013
    • Muskaan 28/07/2013

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