कैसी नजर से देखु तुझे

कैसी नजर से देखु तुझे की अपना बना सकूँ
बाहों मे ले के सोउँ तुझे और सपना बना सकूँ
मोहब्बत किया है हमने यह कोइ गुनाह नही
कैसी गीत सुनाउ अभी की तुझको मना सकूँ
छुपति नही कभी इश्क कही लोगो को क्या कहुँ
बनजाओ मेरी मीत यही की सबको जना सकूँ

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  1. SUHANATA SHIOKAN 15/07/2013

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