तू भूल गया वो सब

तोड दिया दिल मेरा और फिर उसने ये कहा,
अब जाओ कहां तुम जाओगे ये केह्ते ना रुका !!

मेरे हाल पे हंसने वाले क्यों भूल गया तू सब,
तेरे आन्सु मैने पोन्छे थे तुझे याद नही क्यों अब !!

तेरी खातिर हम जग को भूले तू हमको भूल गया,
इतना निर्दयी बेदर्द तू कब और कैसे हो गया !!

अपना घर खुद उजाड के तूने आखिर क्या पाया,
हर कदम पे जिसने साथ दिया तूने उसको छोड दिया !!

पत्थर भी कैसे कहूं तुझे पत्थर भी टूटते हैं,
दरिया भी कैसे कहूं तुझे वो भी तो बेह्ते हैं !!

तूफान कहूं या आन्धी तुझे जो खुद को लील गया,
अपनों को ही रुला के तू खुद पे ही हन्स रहा !!

हमने तुझको कितना चाहा जग है इसका गवाह,
तूने हमको तोड दिया ये भी जाने वो खुदा !!

तुझसे प्यार करने की पायी है हमने ये सजा,
तुझपे ऐत्बार किया और खुद से ही खो दिया !!

कह्ते हैं दर्द देकर किसी को कोई खुश नही रह्ता,
हम भी देखेंगे जीवन मे तेरा वो रोना !!

3 July 2013

7 Comments

  1. SUHANATA SHIKAN 03/07/2013
    • Muskaan 03/07/2013
  2. गुरचरन मेह्ता 03/07/2013
  3. anu 06/07/2013
    • Muskaan 08/07/2013
  4. reena maurya 06/07/2013
    • Muskaan 08/07/2013

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