जाने ऐसा क्यों है !!

ज़िन्दगी क्या है हम नहीं समझ पाए,

क्या है ये जीवन हम नहीं जान पाए !!

हंसना है यहाँ रोना भी हमीं को है

आज हम है यहाँ कल कहाँ होना है !!

जाने ऐसा क्यों है !!

कहीं यारों का मेला है, कहीं कोई अकेला है,

कोई चाहत को तरसा है कोई नखरों में पलता है !!

किसी की आँखों में आंसूं हैं कोई हंसता हंसाता है ,

जाने ऐसा क्यों है !!

हंसाता है जितना है उतना ही वो रुलाता है,

सुख जितना मिलता है यहाँ, उतना ही दुःख भी मिलता है !!

जाने ऐसा क्यों है !!

तकदीर है हाथों में फिर भी इंसान उसे बदल नहीं पाता है,

लिखा है जितना जिसके लिए उतना ही इस दुनिया में मिलता है !!

1 June 2013

2 Comments

  1. Gurcharan Mehta 01/06/2013
  2. sSUYHANATA SHIKAN 05/06/2013

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