सर्द राख से शरारा ढूँढा जाये

उनके इंकार में इकरार का इशारा ढूँढा जाये
चलो सर्द राख से शरारा ढूँढा जाये

पंख नहीं है पर असमान छूने की हसरत है
हौसलों के साथ हवाओं का सहारा ढूँढा जाये

जिंदगी हर मोड़ पे पूछती नया सवाल
तमाम सवालों का जवाब करारा ढूँढा जाये

मुश्किल नहीं है मिलना जमीन और असमान का
शर्त ये है की शिद्दत से किनारा ढूँढा जाये

माना की हुस्न चाँद का भी दागदार है
मुश्किल ही सही मगर बेदाग नज़ारा ढूँढा जाये

कभी लहरों से जंग कभी तूफानों से तकरार
बहुत हुआ सफ़र अब किनारा ढूँढा जाये

धर्मेन्द्र शर्मा

7 Comments

  1. Gurcharan Mehta 08/05/2013
    • dharmendra sharma 13/05/2013
  2. Yashoda agrawal 09/05/2013
  3. Onkar Kedia 11/05/2013
    • dharmendra sharma 13/05/2013
  4. Deepak Srivastava 15/05/2013
    • dharmendra sharma 16/05/2013

Leave a Reply