जिस दम सूरज ढल जाएगा -ग़ज़ल -SALIM RAZA REWA

रात का जादू चल जाएगा
जिस दम सूरज ढल जाएगा

सँभल के चलना सीख लें वर्ना
कोई तुझको छल जाएगा

बचपन के दिन याद आएँगे
जिस्म जवां जब ढल जाएगा

ग़म से हमने यारी करली
वक़्त बुरा अब टल जाएगा

अँगारे मत बोना घर में
घर आँगन सब जल जाएगा

दुनिया का दस्तूर ‘रज़ा’है
आज जो है वो कल जाएगा

सलीम रज़ा रीवा म.प्र. 25.01.13

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