चांदनी है या कोई मोतियों की माला है – SALIM RAZA REWA : GAZAL

.. चांदनी है या कोई मोतियों की माला है मेरे घर के आंगन में तुमसे ही उजाला है .. उसकी ही हुक़ुमत है उस का बोल बाला है जिसके हाथ है कुंजी उसके हाथ ताला है ..उसकी शोख़ नज़रों ने ज़िन्दगी बदल डाली अब अँधेरे जीवन में हर तरफ उजाला है ..जब भी पाँव बहके हैं गर्दिशो की ठोकर से उसने ही मुझे अपने बाँहों में संभाला है ..पल में जिंदगी दे दे पल में जिंदगी ले ले कैसे उसको हम समझें खेल ही निराला है ..मैं तो गिर गया होता रास्ते की ठोकर से उसकी जुस्तजू ने ही ऐ “रज़ा” संभाला है..फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन फ़ाइलुन मुफ़ाईलुन

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  1. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 15/10/2017
  2. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017
  4. Arun Kant Shukla अरुण कान्त शुक्ला 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  5. sarvajit singh sarvajit singh 15/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 15/10/2017
  6. C.M. Sharma C.M. Sharma 15/10/2017
  7. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
  8. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
    • C.M. Sharma C.M. Sharma 16/10/2017
  9. Madhu tiwari Madhu tiwari 16/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 19/10/2017
    • SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 19/10/2017
  10. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 16/10/2017
  11. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 17/10/2017
  12. SALIM RAZA REWA SALIM RAZA REWA 17/10/2017

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