कोई तो है!

कोई तो है!

 

मेरा पाठक मुरझा गया है क्योंकि कोई उसकी समस्या अनसुलझी छोड़ कर सुलझा गया है।

मैं जो लिखता हूं वह नहीं पढ़ता क्योंकि कोई उसकी पढ़ने का भूख भटका गया है।

है कोई जो नहीं मेरा दुश्मन पर है कोई जो मेरे पाठक को घटिया किस्म का पाठ पढ़ा गया है।

मेरा पाठक सहनशील, स्वाध्यायी उत्साही, ईमानदार धैर्यवान, सचरित्र नहीं रहा है

कोई तो है जिसने इसे बहकाकर सुला दिया है।

 

 

•कश्मीर सिंह, रजेरा, चंबा

 

 

3 Comments

  1. चन्द्र भूषण सिंह 06/01/2013
  2. ganesh dutt 07/01/2013

Leave a Reply