ज़रूरी तो नहीं जो दिखते हो वही तुम हो

ज़रूरी तो नहीं जो दिखते हो वही तुम हो
रस्सी हम समझे थे वो साँप की दुम हो
 
अपना खूँ ए उबाल ज़रा संभाल कर रखो
हम भी उम्र से गुज़रे हैं जहाँ आज तुम हो
 
तुम्हारी उम्र के बच्चे शरारतों में मस्त हैं
निगाहें आसमान पे और तुम कहाँ गुम हो
 
ठंडी ही न पड़ जाए कहीं आग जोश की
मुद्दो से परे क्यों साजिशों में गुम हो
 
देखने वाले तुम्हें अपनी नज़र से परखेंगे
ये न समझो हर जगह तुम ही तुम हो

10 Comments

  1. pankaj kumar sah 07/09/2012
    • नादिर 07/09/2012
  2. yashoda agrawal 12/09/2012
  3. ओकेडिया 15/09/2012
    • नादिर 15/09/2012
  4. आशा जोगळेकर 15/09/2012
    • नादिर 16/09/2012
  5. Shadab Azimabadi 29/10/2012

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