दूर जितना ही मुझसे जाएंगें-सलीम रज़ा

दूर जितना ही मुझसे जाएंगेमुझको उतना क़रीब पाएँगेफिर से खुशिओं के अब्र छाएंगेडूबते तारे झिल मिलाएंगेकुछ न होगा तो आंख नम होगींदोस्त बिछड़े जो याद आएंगेमाना पतझड में हम हुए वीरांअब के सावन में लहलहाएँगेइक ग़ज़ल तेरे नाम की लिखकरसुबह ता शाम गुनगुनाएँगेsalimraza rewa

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6 Comments

  1. C.M. Sharma 23/10/2019
    • SALIM RAZA REWA 24/10/2019
  2. डी. के. निवातिया 23/10/2019
    • SALIM RAZA REWA 24/10/2019
  3. Bindeshwar prasad sharma 24/10/2019
    • SALIM RAZA REWA 27/10/2019

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