छठ पर कविता – अरूण कुमार झा बिट्टू

वो घाट की रौनक। वो बाहर बुला रहा हैं ।
आ रहा हैं छठ मुझे मेरा बिहार बुला रहा हैं।

वो घाटों की खुशबू वो दियो का प्रकाश
केले के थम संग फूलो से सजा वो सुंदर घाट
मेरे यह की आस्था विश्वास बुला रहा हैं ।
आ रहा ……..

वो अपनो का साथ , वो उमंगों की बरसात
वो गांव की मिट्टी , वो यारो का साथ
बरती हैं मेरी मां उसका आशीर्वाद बुला रहा हैं।
आ रहा ………

मां के लिए खरीदी हैं साड़ी, पत्नी को समझाया हु
अगली बार हैं तेरी साड़ी , इस पर उसे मनाया हु।
बच्चे न हो उदास कपड़ा उनको तो जरूरी था
जन के मैया बरती हैं, साड़ी उसके लिए भी लाया हु।
मुझको उनका प्यार और आश बुला रहा हैं।
आ रहा …….

वो खाजा वो पुरकिया वो टिकड़ी का संग
वो अपने खेत का गन्ना वो गागर नेमो का रस
खड़ना के दिन गुड खीर वाला प्रसाद बुला रहा हैं।
आ रहा हैं……….

वो ठंडा ठंडा पानी वो मीठा मीठा ठंड
वो मां का ताकना सूरज को
वो देना छठ अरख
वो भोरवा घाट का अमृत प्रसाद बुला रहा हैं ।
आ रहा ……

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  1. Manjusha 23/11/2021

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