प्रवाह ना आ रहा यार 

प्रवाह ना आ रहा यार 

 

ख़तम कर के विद्यालय 

साल हो गए चार 

घूम  घूम हम कर चुके 

दूरी तय हज़ार 

आराम आ गया , काम आ गया 

पर प्रवाह ना आ रहा यार || 

 

ढूँढा तो यार क्या क्या नहीं 

पूछना भी मत क्यूँकि 

ख़ास कुछः हमें मिला नहीं 

या शायद उसकी कदर नहीं 

शायद कदर करने लायक नहीं 

या फिर हम ही लायक नहीं 

या लायक बनने की कदर नहीं 

तो सवाल भी आ गया , बवाल भी आ गया 

किन्तु प्रवाह ना आया यार 

 

ज्ञान कही से छोड़ा नहीं 

पर हमेशा कुछ पकड़ा नहीं 

आसान लगा जो सबसे हमें 

साथ हमेशा था वही 

अटलता विचारो पे नहीं 

अतालता विकारो पे डाली है 

बस अपनाना है इन्हे 

 पर ये भी तो कामभारी है 

बस इसी की तैयारी है’

कोशिश अपनी जारी है  || 

 

द्वारा – मोहित सिंह चाहर ‘हित’

 

One Response

  1. Manjusha 23/11/2021

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