अरूण कुमार झा बिट्टू शायरी

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मैं मुकम्मल हूं अपने फैसले लेने में
कोई मुझे समझाए नही
अपने विचार अपने पास रखे
कोई मुझे बताए नही

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खुशबू हैं फिजाओं में
धड़कन शोर मचाती हैं
ये सब इशारे हैं इस बात के
शायद तू मिलने आती हैं

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बहुत उलझने हैं मिटा दो ना
कुछ अपने दिल का पता दो ना
कई रात गुजरी हैं इसी कस्मकस में
आखिर क्या हैं तुम्हारा फैसला बता दो ना

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क्या हैं तुम्हारा फैसला बता देना
लबों से नही अदाओं से सदा देना
मैं समझ जाऊंगा बस थोड़ा मुस्कुराकर
अपनी सिर्फ पलको को झुका देना

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गम की जिंदगी से मैं थोड़ा थोड़ा ब्रेक लेता हु
और जब तकलीफ बढ़ जाती हैं
मैं सिर्फ उनको देख लेता हूं

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बहुत खूब हैं मोहल्ला मेरा एक जनून रहता हैं
मेरे सामने मेरे दिल का सकून रहता हैं।

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बवंडर में भी आसमान नीला रखते हैं
अजी हम साफ दिल के लोग हैं
बात सिर्फ सीधा रखते हैं

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अपनो पर कर एहसान हिसाब रखते हो।
क्या खूब हो इंसान क्या खिताब रखते हो।

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अपने हुस्न से कह दो
यूं सताया न करे
दिल बच्चा हैं यार
यूं बहकाया न करे

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कुछ ऐसा कर की आज सौ सवाल हो जाए
इश्क हो तेरा मेरा और बवाल हो जाए

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हसरत हैं जो उनकी पूरी हसरत करने दो
कुछ दुश्मन हैं ठीक हैं उन्हें नफरत करने दो।

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मेहनत कर मेरे यार पूरे मंसूबे होंगे
आज नही तो कल सपने पूरे होंगे।

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जमाने की बंदिसो ने नही
तुझे तेरी खाइसो ने रोक लिया
मैं गरीब था सिर्फ इसके लिए
गला अरमानों का घोट दिया।

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आदत में आदत ये डाल लीजिए
हम आप के अपने हैं मान लीजिए
अभी हक हमारा अधूरा हैं माना
कल पूरा भी होगा ये जान लीजिए

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अजी ये बुलंदी खैरात की नही हैं
मुझको मिली मेरे बाप से नही हैं
बरसों बहाए हैं माथे पर पसीना
मेहनत ये सिर्फ एक रात की नही हैं

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हालात कहता हैं रूक जा आसान नहीं हैं
दिल कहता हैं रुकना तेरा काम नही हैं
फिर हौसला कहता हैं देखे
आखिर क्या आसान नहीं हैं।

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जो नफरत हैं वो सारी नफरत सिमट जाएगी
अजी कभी मिलो तो हमसे मुहब्बत पनप जायेगी।

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बड़ी मझधार से निकले हैं
अब चूकेंगे नही
जब डूबे थे तब डूबे थे
फिर डूबेंगे नही

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दरिया आग की हो फिर भी
राह ढूंढ लेते हैं
इतनी हसरत हैं मंजिल पाने की हमे
की राह काटे भी मिले तो हम चूम लेते हैं।

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मैं क्या खूब हु साहब
आज भी उम्मीद रखता हु
वो किसी और की हैं
और मैं उसकी तस्वीर रखता हु

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इश्क की दुनिया में हम गरीब रह गए
सबको मिला सनम और हम दिन रह गए

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गरीब अपनी दुआओं में असर रखते हैं
हर एक जन इस बात की खबर रखते हैं
मैने देखा हैं उनके किलो को जमींदोज होते हुए
जो जरा भी अपने जहां में अकड़ रखते हैं।

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मुस्किलो में भी ये ख्याल रखो
अपने हर सवाल का जवाब रखो
कब तक दूसरे के भरोसे रहोगे
अपने हाथ खुद अपना मशाल रखो।

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तुम जो कहो तो सारे गम हम ओढ लेंगे यार
तेरे खातिर सारा शहर भी छोर देंगे यार
पर ध्यान रहे ये साथ हमारा छूटे ना कभी
नही तो धड़कन शाशे भी हम छोर देंगे यार।

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तुम कह रही हो चले जाओ मुझसे
हाय ये नफरत कैसे सह पाऊंगा
दिल दे चुका हु जब जान तुमको
तो खाली जान ले कर में किधर जाऊंगा

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चलो अच्छा किया तुमने , भुला दिया मुझको
पर करु कैसे , मैं ये जीवन में
बरसों हैं बीते आज , बिखरे हैं सारे साज
पर आज भी रहते हो तुम ही जीवन में

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ईशान तेरी हैसियत
बस इतना बनता हैं।
उसकी शक्ति तन से निकली
फिर मिट्टी बचता हैं।

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क्या खूब था इश्क तेरा
ना हम जिए न जिंदा हैं
ये शाश फिर भी चलती हैं
इसमें तेरी याद जिंदा हैं

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वो रोज नए नए प्यालों से पीते हैं
लबों की सुर्ख गुलाबों से पीते हैं
उन्हें नही मतलब इश्क वफ़ा मुहब्बत से हजूर
वो तो सिर्फ जिस्म के ख्यालों से पीते हैं।

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मैने आज अपने दिल का सदा मांगा हैं
वो खुश रहे बस , चाहे रहे जिसके साथ
बस यही एक दूआओ में एक दुआ मांग हैं

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तुम्हारे लिए जहा से खफा रखेंगे
हम अपनी लबो पर तुम्हारी जुबां रखेंगे
तुम कहो तो सारा जहा भी छोर सकता हु
पर फिर भी हम तुम्ही से वफ़ा रखेंगे।

One Response

  1. hitishere 24/10/2021

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