अधूरे – शिशिर मधुकर

हम अधूरे रह गए हैं बिन तुम्हारे प्यार के
तुम नहीं तो खाक हैं ये सुख सभी संसार के

मुस्कुरा देते हो तुम तो मुस्कुराते हम भी हैं
तुम ही राजा हो सुनो ना दिल के इस दरबार के

ना जुबां पे नाम आए हो नहीं सकता कभी
हम ऋणी हैं उम्र सारी बस तेरे उपकार के

तुम कहो या ना कहो है इल्म तेरे इश्क का
हर किसी पे गुर कहां होते हैं सुन इजहार के

तुम नहीं जो दिख रहे हो बढ़ गईं बेचैनियां
बिन तुम्हारे पार कोई कैसे हो मझधार के

शिशिर मधुकर

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