शायरी- अरूण कुमार झा बिट्टू

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शायर हूं मैं साहब
शायराना अंदाज हैं।
मेरी दौलत कुछ और नहीं
बस दिल की आवाज हैं।

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तू मेरी चाहत हैं।
तू मेरी इबादत हैं।
मैं कैसे भूल जाऊ तुझे
तू तू मेरी पहली मुहब्बत हैं

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हम बदल गए तुम बदल गए
राहें जिंदगी के मंजिल बदल गए
पर ना बदला वो इंतजार , वो कसक वो प्यार
और ये दिल जो आज भी तुम्हारा हैं।

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शायर हूं मुझ शायर का कद्र कीजिए
अजी आप को आप से चुरा लूंगा
थोड़ा सब्र कीजिए

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ये दुनिया हैं मतलब की
सबके मतलब का बन जाइए
जो मतलब का न बन पाएंगे
तो कबाड़ में नाम लिखवाइए

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खुशामदीन खुशामदीन करे क्या
हाले दिल अपना कहे क्या
अपने हाल जीते हैं अपने हाल मरेंगे
अजी आप हैं बड़े हमे क्या

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तेरे इश्क ने मुझे घायल बना दिया
था किस लायक मैं मुझे लायक बना दिया
तेरे दर्द में भिगो कर लिखता हु शायरी
और शायरी ने सब को मेरा कायल बना दिया

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शिव नाम पे जीना हैं शिव नाम पे मर जाना
जीवन सफल करना हैं तो शिव शिव करते जाना।

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मुझे हैं लाख गम सेह लूंगा मुझे आदत हैं
तुझ पर गम का कोई साया भी न पड़ने पाए
हैं अफसोस ये अफसोस सारी उम्र रहेगी
तुम से हाले दिल क्यों न कहने पाए।

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कब तक गमों को हम पीते रहेंगे
तुम मेरी हम तेरी यादों में जीते रहेंगे
चलो जो हैं जैसे हैं उसी हाल मुस्कुराले
समझौते अब जीवन के तरीके रहेंगे ।

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मेरी हसरत न थी पर मुझे करना पड़ा
तूने भला समझा मुझको
तो मेरा फर्ज था
मुझे भला बनना पड़ा

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कितनी बेदर्दी हैं वो
मुझे घुमा रही हैं
पहले दिल चुराया और अब
नजरे चुरा रही हैं ।

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संभाल कर रखो नजरो को
ये गुस्ताखी कर रही हैं।
संभाले न संभालेगा मेरा दिल
ये बहुत भरी पड़ रही हैं ।

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