हिम्मत का गांडीव

 

आज तेरी परिस्थिति विपरीत हुई तो क्या हुआ

आज अगर तेरा वक्त नहीं तो क्या हुआ

आज अगर तू शून्य पर रह गया तो क्या हुआ

आज तेरे अजीज पराये हो गए तो क्या हुआ

याद कर तू वही अर्जुन है हाँ वही धनंजय है

अपनी हिम्मत के गांडीव को कस के पकड़

अपनी मन शक्ति के अचूक बाणों को पहचान

श्री कृष्ण चरणों की और निहार और ध्यान से सुन

उन चरणों से निकली तेरी आत्म बल की आहट

जो गरज गरज कर कह रही है संघर्ष कर !

हाँ संघर्ष कर ! युद्ध कर! पहचान अपनी संकल्प शक्ति

देख पर्वत ध्वस्त हो रहे हैं और शत्रु परास्त हो रहे है

 

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