खाली जगह

एक सज्जन के बराबर में
देख कर वो खाली जगह
उठा एक प्रश्न मन में
जाननी चाही उसकी वजह

जवाब मिला कष्ट भरा
क्यों है ये खाली जगह
छूटा साथ हमसफर का
दूर गई वो इस तरह

जैसे वो कभी थी ही नहीं
तभी है ये खाली जगह
ऐसा मेरा व्यक्तित्व तो नहीं
जो चली गई बिना वजह

याद में उसकी तड़प रहा हूं
देख कर ये खाली जगह
जीवन में यूं ही भटक रहा हूं
झेल कर जिंदगी को अजनबी की तरह
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देवेश दीक्षित

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