कब तक

कब तक होगा अत्याचार
कब तक बहेंगी खून की नदियां
प्रतिशोध की भयंकर ज्वाला में
कब तक बीतेंगी सदियां

भारत देश तो आजाद हो गया
पर न आजाद हुई मन से कमियां
बुराइयां अभी भी कायम हैं
इसी में बितेंगी सदियां

बहू बहनें भी सुरक्षित नहीं
कब मुरझा जाएं ये कलियां
दरिंदगी की सीमा नहीं
दर्द में बितेंगी सदियां

भयानक बड़ा ही मंजर है
कर्म हैं निहायती घटिया
मानसिक बीमारी से पीड़ित ये
कर रहे बर्बाद अपनी सदियां
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देवेश दीक्षित

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