शायरी- अरूण कुमार झा बिट्टू

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हम तो थे दीवाने दीवाने रहेंगे।
अब सिर्फ तेरी यादों के सहारे रहेंगे।
तू कर ना कर मुहब्बत अब ओ मेरे सनम
पर हम तो थे तुम्हारे तुम्हारे रहेंगे।

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अरे देख तो सही मेरा क्या हाल हो गया हैं।
तेरा दर्द लिखता हु और शायर मेरा नाम हो गया हैं।

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हाय अपनी चाहत अपनी मुहब्बत पर चोट किया मैने
तुम बदनाम ना हो जाओ था कदम रोक लिया मैने।
तुम खुश रह लोगी मेरे भी बगैर
हाय हाय ये कैसे सोच लिया मैने ।

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औरों से जंग में दिल हार नही सेहत हैं ।
अपनो से जंग में ये हार जाओ कहता है।
ये दिल के रिश्ते भी बड़े अजीब हैं साहब
यहां हार कर भी जीत और जीत हार जैसा लगता है

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अरे नामुमकिन को भी मुमकिन ये काम कहते हैं।
अरे जिद वाले ही जग में कमाल करते हैं।

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मिले तो मखमल नही तो नंगे पाव चलते हैं।
हम तो वक्त के नुमाइंदे हैं वक्त के साथ चलते हैं।

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मखमली बदन हैं तेरा रेशम से बाल हैं।
तेरी आखों में डूब कर हुए लाखो बेहाल हैं।
तुझे देखू तो जी करता हैं बस देखता रहूं
अरे तू लड़की हैं चुम्बक हैं या कोई जंजाल हैं।

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जीना ही हैं। तो जी लेंगे ।
तेरी जहर जुदाई पी लेंगे।
तू खुश हैं ये क्या कम हैं
हम युही दर्द में जी लेंगे।

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जिंदगी की ओर से मैं आप को सलाम करता हु
आखों के अश्क आप के मैं अपने नाम करता हु
मत पूछिए हमसे क्यों ऐसा काम करता हु।
वजह इसकी एक हैं । मैं आप से प्यार करता हूं।

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उजड़े हुए चमन में कोई भंवरा नहीं आता
जब टूट जाए दिल तो कोई दिल को नही भाता।

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अंग अंग में रस भरल बा
रूप के छलकत गगरी
अब तू ही बतावा देख के तोरा
केकर ना मन बिगड़ी।

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हर किसी को देख हम बेचैन नही होते
यू ही किसी की याद में दिन रैन नही खोते
खुशनसीब हो तुम जो हम करीब हैं तुम्हारे
वरना हम सभी के करीब नही होते।

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तुझ से हजारों मील दूर हैं
तेरे गम में दिल चूर चूर चूर हैं।
जी तो करता हैं चला आऊ तेरे पास
पर हैं नही किराया बस यूं मजबूर हैं

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चांदनी ने पूछा चांद से क्यों हो आज तुम उदास
क्या हैं किसी के पास हसीना मुझसे ज्यादा लाजवाब
चांद ने कहा मत कर गरूड़ इतना तुझ से भी हैं कोई खास
मेरी कहा किस्मत ऐसी वो तो हैं अरूण के पास।

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कलियों की मुस्कान को भंवरा चूमता हैं
शम्मे को देख जैसे परवाना झूमता हैं ।
कुछ ऐसा ही हाल हैं हमारा मेरे यार
मैं चातक हु तुम सावन को ढूंढता हु।

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