न तुम तुम रहे न हम हम रहे।

न तुम तुम रहे न हम हम रहे
इतना डूबे की गम गम न रहे
गए थे के बस तेरी तलाश हो
क्या मुल्तवी करी तुने न पूरा हो मेरा
न मुझमें कुछ कम रहे
खूब लोट कर आए है
खून तो रहे पर पानी न रहे
कहे भी तो क्या क्या कहें
जब तुम तुम न रहे हम हम न रहे
की मुकदर का सिकंदर भी कहे
और सिकंदर ही न रहे
जिस राह पर चले वो राह ही न रहे
लोटू जब में थका हारा
खुशियां भी न रहे न कोई गम रहे
न तुम तुम रहे न हम हम रहे।

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