किसी की जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया।

जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया
किसी राह ने नाता तोड दिया
खूब चली चाले कभी सैनिक मरे
कभी राजा ने जीना छोड़ दिया
बस सिरे पर जिंदगानी थी
इतना गम हुआ की पीकर भी नसा में रहना छोड़ दिया
जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया

ओठों की हसीं ने खुशी पाना छोड़ दिया
आंखों में नमी पर पलकों को भिगाना छोड़ दिया
चलते तो आज भी उसी राह पर है
बस दर बदर किसी को पाना छोड़ दिया
चांदनी रातों का एहसास पाना छोड़ दिया
ख़ुद से छोड़ दुनिया से नाता जोड़ लिया
खुशबू तो आज भी है जुल्फों में
बस उन्होंने महकना छोड़ दिया
जुल्फों ने मुस्कुराना छोड़ दिया

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