शायरी – अरूण कुमार झा बिट्टू

1
तेरी चाहत की आग में जलने लगा हूं
तेरी फिक्र बेशुमार करने लगा हूं
तू कर न कर मुहब्बत ये तेरी मर्जी
पर मैं तुझसे प्यार करने लगा हू

2
अरे जाओ हजूर ढूंढ लो
पछताना पड़ेगा
अरे सच्ची मुहब्बत हैं मेरी
तुम्हे लौट कर फिर आना पड़ेगा।

3
मुहब्बत बया करनी हैं आखों से करो
लब कहा जरूरी हैं
मैं भी समझता हू तुम भी समझती हो
तो कहना क्या जरूरी हैं

4
जूझते रहिए जिंदगी में जतन करते रहिए
जो सोचा हैं वो मिलेगा
बस प्रयत्न करते रहिए

5
लोग डूबते नही उगते को प्रणाम करते हैं
जो नंबर 1 होता हैं सिर्फ उसी को याद रखते हैं

6
अकड़ किस बात की प्यारे
अहम किस बात की प्यारे
हैं तय सब जानते हैं ये
होगा तन राख ही प्यारे

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