आईना………..देवेश दीक्षित 

आईना कोई दिखाए तो डरता है इंसान
खुद आईना दिखाए तो मुस्कुराता है इंसान

दूसरों की लाचारी पर इतराता है इंसान
अपनी बारी पर मुंह छुपाता है इंसान

ये आईना वो आईना नहीं
जिसे रोज़ निहारता है इंसान

ये आईना तो वो आईना है
जिससे मन को आघात पहुँचाता है इंसान

रिश्ते नाते सब धरे रह गए
उन रिश्तों को औकात दिखाता है इंसान

हमराज न बनाना किसी को कभी
पीठ पर खंजर घोंपता है इंसान

दोस्ती करना तो सोच समझ कर करना
दोस्ती में अकसर डुबाता है इंसान

भरोसा करो पर रहो सतर्क भी
जिंदगी में यही शिक्षा देता है इंसान

यही तो वो आईना है
जिससे बचता है इंसान

आईना कोई दिखाए तो डरता है इंसान
खुद आईना दिखाए तो मुस्कुराता है इंसान
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देवेश दीक्षित

2 Comments

  1. Tanveeii Singh 19/08/2021
    • deveshdixit 30/08/2021

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