ऐ दोस्त………..देवेश दीक्षित 

ऐ दोस्त तू है तो
शुकून है दिल को
कि मेरा कोई अपना है
तेरे जैसे दोस्त का होना एक सपना है

ऐ दोस्त तू है तो
मैं भूला सांझ सवेरे को
वरना तो मैं गमों से लिपटा होता
अंधेरे को बना कफन मैं सोया होता

ऐ दोस्त तू है तो
जैसे पाया श्री कृष्ण को
जो सुख में तो अपना प्यार दे
पर हर मुश्किल में भी साथ दे

ऐ दोस्त तू है तो
सलाम है तेरी दोस्ती को
जो दिल से अपने लगाया है
अपना हमराज हमें बनाया है

ऐ दोस्त तू है तो
जग जैसे फुलवारी हो
जश्न हो मस्ती धमाल का
अपनी दोस्ती का रंग हो कमाल का
……………………………………….
देवेश दीक्षित

Leave a Reply