नए फोन का जोश………..देवेश दीक्षित 

नए फोन का जोश
उड़ा देता सबके होश
मैं भी इसमें खो गया हूं
ले कर इसको सो गया हूं
आँख खुली जब मेरी सुबह को
देखने लगा मैं अपने फोन को
नया फोन है क्या क्या कर लूं
ये भी कर लूं वो भी कर लूं
इसको देखूं की उसको देखूं
क्या देखूं और क्या न देखूं
इसी उलझन में उलझा बैठा
नए फोन का विस्तार देखा
कितने ऐप समाए इसमें
कितने और डालने इसमें
असमंजस में पड़ गया हूं
बीच राह में अटक गया हूं
अदभुत इसकी तकनीक देखकर
कई समस्याओं को मैं झेलकर
तब इससे पार पाया हूं
इसको तैयार कर पाया हूं
जब तक न समझ लूं इसको पूरा
कैसे छोडूं इसको अधूरा
अब समझ में आने लगा है
दिमाग में मेरे छाने लगा है
आँखों में मेरे नींद नहीं है
मारे खुशी के चैन नहीं है
हर ऐप को समझ चुका हूं
फोन है एंड्रॉयड ये मान चुका हूं
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देवेश दीक्षित

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