जात पात………….देवेश दीक्षित 

जात पात के इस सागर में
डूब गए मूल्य जीवन के
कोई आसरा बाकी नहीं है
संस्कृति के मूल्य सब खो गए कहीं हैं
खेल जात पात का रचा है इंसान ने
इंसान को बनाया है सिर्फ भगवान ने
ये कैसी दुनियादारी है
एक दूसरे पर पहरेदारी है
स्वांस भी पूछ कर लेनी होगी
जिंदगी भी दूजों की मोहताज होगी
भगवान भी ऊपर से सोचता होगा
न इंसान बनाया होता तो अच्छा होता
………………………………………………
देवेश दीक्षित

Leave a Reply