कारगिल दिवस………..देवेश दीक्षित

सन् 1999 में
कारगिल का युद्ध शुरू हुआ था
सहज नहीं था युद्ध ये
हमारे जवानों का जो लहू बहा था

कुछ घुसपैठिए घुस आए थे
उनको मार भगाना था
अधिकार जो जमाए बैठे थे
उनको शमशान पहुंचाना था

जवान हमारे अड़े रहे
कारगिल को जो पाना था
कई वीर जो हमारे शहीद हुए
उन सबका प्रतिशोध लेना था

छुप कर जो वार कर रहे थे
उन सबको ढूंढ कर मारा था
भारत माता की जय बोल के
दुश्मन का गला काटा था

जवान हमारे सफल हुए
कारगिल पर तिरंगा फहराया था
जिन जवानों को हम खो चुके
उनके घर में मातम छाया था

कैसी थी अनहोनी ये
हिंदुस्तान दुख से थर्राया था
तिरंगा भी उनके सम्मान में
उनसे लिपटा आया था
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देवेश दीक्षित

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