मगर से बैर – डी के निवातिया

दूसरों की मुखालफत में दिन रात रहता है,
आग का दरिया बनकर पानी संग बहता है
समझो कितना शातिर होगा वो शख्स,
जो पानी में रहकर मगर से बैर कहता है !!
!
डी के निवातिया

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