शायद वो सिर्फ एक सपना ही होगा : भाग – ४

कितनी पीड़ा कितनी आशा
सफलता की है क्या परिभाषा
धनवान हो गए या नाम बनाया
आखिर हमने है क्या पाया

कभी बुरा रास्ता था अपनाया
किसी का कभी ह्रदय दुखाया
मोल भाव को नाम, ब्यापार का देकर
लोभ को कैसे कर्म बनाया

बखान सुंदरता का उसका करके
भावनाओ के रहस्य जाल मे लिप्त
प्रेम शब्दावली मे सखी सखा जो
काम वासना मे हर जीव संतृप्त

लकीरे जो प्रभु ने हथेली मे बनायीं
शास्त्रों ने जो सबको राह दिखाई
सब पाने के मोह मे धूमिल है
विस्मरण बात जो ”गीता” ने बताई

सब त्याग प्राणी परम के चरणों को छूकर
इच्छा-शक्ति हो एक दिन इन्द्रियों के ऊपर
” हरि” नाम को सिर्फ, जपना ही होगा
शायद वो सिर्फ एक सपना ही होगा

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