अंसुओ से भीजी थी कमीज़ फिर भी मुस्कुरा कर चल दिए।

आंसुओ से भिजी थी कमीज फिर भी मुस्कुराकर चल दिए
कर्ज में डूबे थे बेदम फिर भी फर्ज निभाने चल दिए
ये कोई धूल नहीं वत्नफरोशी मिट्टी है
घर की रीति उड़ गई फिर भी मिट्टी बचाने चल दिए
भीजी थी आंसुओ से कमीज फिर भी मुस्कुराकर चल दिए

बच्चों के सिर से हाथ उठ गए
वतन के आगे जिंदगी से रूठ गए
घर से निकलने पर वो खुद नहीं उनके बुत गए
कहते थे जो की फीर से आऊंगा
तेरी हाथ की रोटी जरूर खाऊंगा
अगले बरस मै फिर आऊंगा
अपना अर्ज भूल कर फर्ज निभाने चल दिए
आंसुओ से भीजी थी कमीज फिर भी मुस्कुराकर चल दिए

तन कट कर गिर गया वर्दी बचाने चल दिए
मौत का अंधकार छाया हुआ
देश का भविष्य बचाने चल दिए
आंसुओ से भीजी थी कमीज फिर भी मुस्कुरा कर चल दिए

4 Comments

    • rashmidelhi 19/08/2021
    • rashmidelhi 24/08/2021
    • rashmidelhi 27/08/2021

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