अवधी चलत फिरत है।

अवध कै अवधी कौन जाने
कत्थक नृत्य शैली लखनऊ घराना
बड़े ही है माने दाने
इका हम जैसन लोग का जाने

दाल भात बरिया पूरी
शादी बियाह मां रहये जरूरी

रंगन से प्यार देखो कतरा
सब समान है इहां कौनो का नाय है इहाँ खतरा

राम लला के जन्म भूमि है
मुगलों की ये कर्म भूमि है
एक द्वारे नमाज़
एक द्वारे ज्योति जलत है सांझ

मुगलई ईरानी हमरे मां बसत है
घर घर गईया हमका दिखत है

घाघरा नदी पर अवध बसत है
गोमती तक हमको दिखत है

बाग बगीचा खुब भरत फुलत है
कविता हमरी अवध पर चलत फिरत है।

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