रात हुई।

न दुआ न दवा मर्ज ये लाईलाज हुआ
खुली किताब रखी है फिर सबका कहना है
कुछ तो इसमें राज हुआ
बेअसर हो गई सारी असरदार शख्सियत
कुछ न महसूस होने की ये कैसी थी नियत
बहुत घूमें थे दिन भर हम
घर चलो बहुत रात हुआ

अंत के अलावा बाकी सब बात हुआ
कहां चले गए थे सब जो जला जला सा भात हुआ
कितने वैद दिखाए कितने फातिया पढ़वाए
बेअसरदारी में किस किस का हाथ हुआ
कहां घूमें थे दिन भर जो इतनी रात हुआ
तुम्हारे दिल ओ दिमाग से ऐसा क्या बात हुआ
दवा हारी दुआ खाली बेअसर सब जज़्बात हुआ
बाहर ही तो थे रात भर भीतर आओ अब तो रात हुआ।

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