जरा रंग तो दिखाने दो।

अभी बरसात में जरा रंग तो दिखाने दो
अभी अभी तो रंगा है रंग में जरा उसे निखर तो जाने दो

क्यों इतना डरते हो तुम अभी छप्पर भी ढह जाने दो
पहली बारिश है ये सभी को तो बह आने दो

बारिश में क्यों भीगते हो छत पड़ी तो है
सहारे से ही सही दीवारें खड़ी तो है
अरे बाहर क्यों खड़े हो देओढ़ी खाली पड़ी तो है
देखो मत और जगह, सब जगह पैरों की लड़ी तो है

क्यों खड़े हो बारिश में
सिर ढकने के लिए छत चढ़ी तो है
छाता भी तुम्हारा उड़ गया
देखो मेढ़क भी चिढ़ गया
तेज़ सरसराती हवा बारिश से भीड़ गया
तुम घबराते क्यों हो
इनको भी जरा खेल तो आने दो
देखो हलवाई भी रुका है
कहता है गर्मगरमहट अभी तलूंगा
जरा तेल तो आने दो।

देखो बच्चों की तैरती नांव
छमछमाते छत की सुंदरी के पांव
अरे देखो ये नजारें तुम भी
अभी सिर पर छत चढ़ी तो है।

Leave a Reply