मेरी शायरी – अरुण कुमार झा बिट्टू

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ये जिंदगी हैं क्या एक होर सी लगी हैं।
सागर है जैसे कोई , कोई छोर ही नही है।
आता हु तेरे पास तो पा जाता हूं सकून
तेरे सिवा हमारा कोई ठोर ही नहीं है।

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आज किस्मत ने क्या खूब सितम ढाई हैं।
तू सामने हैं मेरे मगर पराई हैं।
दिल कहता हैं नजरे भर भर देखू तुझे
फिर ख्याल आता हैं ये तो बेहयाई हैं।

One Response

  1. डी. के. निवातिया 28/07/2021

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