सुनो! कहता हूं मैं अशमां।

सुनो! कहता हूं मैं आसमां
एक ही रंग मेरा और एक ही है शमा
ढूंढो तो पाओगे
क्या मुझ तक तुम पहुंच पाओगे
तुम तक दिखता रंग बिरंगा
तुमसे भी हूं मैं देखो चंगा

क्या मेरे रंग को तुम समझ पाओगे
मुझमें कैसे कक्ष बनाओगे
सुनो ! कहता हूं मैं आसमान
क्या मेरे जैसा मिलेगा कोई समान

मेरा रंग केवल मुझ तक है
मेरा संग सब तक है
चलोगे जहां तक मुझे पाओगे
जितना पास तुम मुझ तक आओगे
उतना ही दूर जमीं को पाओगे
फिर भी मुझ तक न पहुंच पाओगे

चांद से सितारों तक मुझमें ही पाओगे
क्या धरती से तुम निकल पाओगे
अरे! अरे! मेरी चाह में कितना तुम दूर आओगे
मै आसमां हूं
हकीकत में छुपी एक कल्पना हूं।

न आदि न अंत सब भ्रम पाओगे
फैला कहां तक कैसे समझ पाओगे
जितनी ही दूर तुम जाओगे
दुआओं की राह भी भूल जाओगे
न मनुष्य न पक्षी न एक तिनका पाओगे
साथ न तुम अपने तन का भी पाओगे

क्या तुम मेरे रंग को समझ पाओगे
धरती का कर्ज है तुम पर कैसे उभर पाओगे
भरे बोझ से क्या उड़ान पाओगे
धरती का प्यासा आसमान से क्या पान पाओगे
धरती जैसा यहां कुछ न पाओगे
खुद को यहां मेरा बुत पाओगे
सुनो! कहता हूं मैं आसमां
सब कुछ है मुझमें समां

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