जिन्दगी………………देवेश दीक्षित

जिन्दगी तू एक पहेली है

जिसको लिया तूने आगोश में

उसी के साथ तू खेली है

जिन्दगी तू एक पहेली है

 

किसी को कांटे तो किसी को गुलाब दिए हैं

तूने अपने दामन में कई राज़ दफन किए हैं

तुझे बनाना चाहता हर कोई सहेली है

जिंदगी तू एक पहेली है

 

अदभुत तेरे नज़ारे हैं

उन नज़ारों में तेरे बहाने हैं

ऐसे खेल तू खेली है

जिंदगी तू एक पहेली है

 

किसी को तेरी चाह है

तो किसी से तू कहीं रूठी है

जीवन में रात उसके घनेरी है

जिन्दगी तू एक पहेली है

 

तेरी भी एक सीमा है

तू भी समय से बंधी है

क्या कहूं ये क्या पहेली है

जिन्दगी तू एक पहेली है

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देवेश दीक्षित

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