मेरे हुस्न में जो तुम फसने लगे हो।

मुझे देख कर जो तुम हसने लगे हो
लगता है मेरे हुस्न में फसने लगे हो

घरी हर घरी जो दिखने लगे हो
धूप में भी जो तुम सिकने लगे हो

सांझ हो या अंधेरी रात बेवक्त जो तुम मिलने लगे हो
लगता है मोहब्बत की गलियों से गुजरने लगे हो

रहते हो हर वक्त खुली खिड़की की फिराक में
किसी हसीन लम्हों की झांक में

झुल्फो की उल्फत हो
मोहब्बत का खत हो

भागे इधर उधर
देखे इस कदर

नगमों में नज्मों की बात हो
सपनें हो हजार पर कटी न रात हो

तुम्हारी आंखे से लगता है के अब जगने लगे हो
इश्नु जो तुम लगाने लगे हो
बूढ़ों का दिल क्यों जलाने लगे हो

आशिकी में बच्चों को चॉकलेट दिलाने लगे हो
बीन तार के अफसाने पहुंचाने लगे हो

खूब इधर उधर झांकने लगे हो
खुली खिड़की पर नजरें टिकाने लगे हो

मेरी जुल्फों से आहट जो पाने लगे हो
मेरे पहचाने मनचले हो के मैखाने चले हो

मुझे देख कर जो तुम यूं हसने लगे हो
मेरे उल्फत में कितना तुम फसने लगे हो
मोहबब्त की गलियों से जो गुजरने लगे हो।

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