।। जीवन ज्योति।।

जीवन ज्योति की लौ होती प्रज्ज्वलित, पाकर आयु का ईंधन ।
जगमग जगमग करे प्रकाशित, हो प्रफुल्लित मानव का मन ।। 1 ।।
जीवन पथ को यह ज्योति ही, समुचित राह दिखाती है ।
किस ओर हमे कब जाना है, यह ज्योति हमें बतलाती है ।। 2 ।।
कब यह होगी जागृत, कब जीवन को मिलेगी गति ।
किसे बनाएगी महामानव, किसे प्राप्त कराएगी अधोगति ।। 3 ।।
यह सब इस पर निर्भर करता, मानव कैसे करता उपयोग ।
आत्मोन्नति की ओर इसे ले जाता, या अधोगति मे करता इसे प्रयोग ।। 4 ।।
जीवन ज्योति के प्रकाश से ही, आत्मा करती अपना उद्धार ।
पतन की खाई से निकालकर, दिखलाती उन्नति का द्वार ।। 5 ।।
मानव मन है कहता, सब कुछ है पूर्वनिर्धारित ।
हम क्यों इस ओर प्रयास करें, जब सब कुछ है पहले से निश्चित ।। 6 ।।

उत्थान यदि होना है, तो निश्चित ही हो जाएगा ।
पतन ही है यदि लिखा भाग्य मे, वह अपना खेल दिखाएगा ।। 7 ।।
केवल भाग्य भरोसे ही, ना जा सकता सब कुछ छोड़ा ।
आत्मोद्धार की डगर पकड़कर, पुरुषार्थ भी करना होता थोड़ा ।। 8 ।।
जीवन ज्योति के उज्जवल प्रकाश मे, निज आत्मा की कर पहचान ।
इसकी शक्ति को कर जागृत, जीवन अपना बनाओ महान ।। 9 ।।

ज्वनल काल ना वश मे अपने, पर उद्धार आप हो सकता है ।
यह हमे स्वयं ही करना होगा,
अन्य ना कोई कर सकता है ।। 10 ।।
दर्शनिक, चिन्तक और विचारक, सबका एक ही कहना है,
आत्म शक्ति की कर पहचान, उद्धार आप ही करना है ।। 11 ।।
जीवन ज्योति के प्रकाश मे, आत्मिक शक्ति का कर उत्थान ।
ईसा, मोहम्मद और गांधी ने, जीवन अपना किया महान ।। 12 ।।

अधोगति मे अपने को डुबोने वालों को, इतिहास क्षमा कैसे कर सकता है ।
नाम भले ही हो उनका, पर अपयश ही अन्त मे मिलता है ।। 13 ।।
जो समय मिला हमे ईश्वर से, उसका उपयोग आप ही करना है ।
जिस ओर मिले उत्थान मार्ग, उस ओर स्वयं चल पड़ना है ।। 14 ।।
अवधि ज्योति की सीमित है, शीघ्र ही अपना कर उद्धार ।
जीवन को दो इक नई दिशा, उद्देश्य इसका करो साकार ।। 15 ।।

अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

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