बंद ताले भी खुल जाया करते है।

भरी संदूक थी किसी की जीवन की आस थी
कुछ न था बस वही पास था
उस पर खुब ताला कसा
देखना था कैसे निकलता है
जंजरी भी दी मेने फसा

सभी ने एक गुट बनाया
ताले वाले खुब सताया
रात दिन खुब रुलाया
सुखी रोटी का भी मोहताज बनाया

ताले वाले का संदूक बेहद कीमती
जिंदगी की उसमे हर सीन थी
चली न बस किसी अजीज की
सभी सोचते उसमे क्या ऐसी चीज थी

एक दिन ताले वाले को संदूक ने आवाज लगाई
दूर खड़ा था वो फिर भी दे गया सुनाई
पैरो से लाचार था
संदूक उसका अकेला सार था

ताले ने कहा मे थक गया हूं
एक जगह पर पक गया हूं

देखो मुझमें लगी जंग को
कुछ नही कर सकते हो रंग तो दो

ताले वाले ने कहा तुम्हें मैं रंगूंगा नही
बहाने से टूट जाओ न कहीं
ऐसे मेरा संदूक महफूज तो है
टिके हो तुम तो बना महबूब तो है

एक दिन सहसा ताला गुस्साया
अपनी सारी ताकत लगाया
सहसा एक आवाज आई
एक अंग टूट कर बिखर आई

निकला कुंढे से बाहर वो
जीवन से मुक्ति आजादी की राहत वो

देखा तालेवाले ने
खुब बिलखाया ऊपर वाले से
चला न बस किसी तरह का
संदूक सजोए आखिर कैसे
खुला दरवाजा चोरों के राह सा

बहुत अजीज बहुत करीब
ताला ही रहा तब क्या लाऊं हकीम

बंद ताले भी खुल जाया करते है
दिल के अंदर बसेरा हो जिसका
वो भी रेत की तरह फिसल जाया करते है।

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