एक बेटी का पिता से छोटा सा अनुरोध लेखक अभिमन्यु कुमार स्याल, Abhimanyu Kumar Siyal

पापा पराई नहीं होती है बेटियां थोड़ा खुद को समझा लो न,तुम्हें भगवान मानती हूं मैं मुझे भक्त समझ अपनालो न।……2

भाई की छोटी सी उपलब्धि पर भी प्यार बहुत लुटाते हो,
पर मेरी बारी आती है जब तक तुम क्यों कंजूसी कर जाते हो।……2
पापा भाई की तरह मुझको भी कभी घर का चिराग कह कर पुकारो ना,चलो बेटी ने सही मुझको खुद का ही रक्त समझन अपनालो ना।।

पापा पराई नहीं होती है बेटियां थोड़ा खुद को समझा लो न,तुम्हें भगवान मानती हूं मैं मुझे भक्त समझ अपनालो न।

ख्वाब सजाए हैं बहुत से मैंने बस सबको दिल में ही छुपा रखा है,टूट ना जाए जाहिर करने से इसलिए सीने में दबा रखा है।…….2
पापा मेरे सारे सपने सच हो जाए बस इतना खुद को मना लो ना,मेरी खूबियों को निखार दो थोड़ा और मेरी सब कमियों को छुपा लो ना।

पापा पराई नहीं होती है बेटियां थोड़ा खुद को समझा लो न,तुम्हें भगवान मानती हूं मैं मुझे भक्त समझ अपनालो न।

मेरा बेटी होना क्यों कलंक हो गया यह मुझको अब तक समझ में आया है,घर की चारदीवारी में घुट कर रहना क्यों मेरे हिस्से आया है…….2
मां तुम तो दिल भी पढ़ सकती हो थोड़ा पापा को भी पढ़ना सिखा दो ना,आईने की तरह साफ हूं मैं भीतर से चुपके से उन्हें बता दो ना।

पापा पराई नहीं होती है बेटियां थोड़ा खुद को समझा लो न,तुम्हें भगवान मानती हूं मैं मुझे भक्त समझ अपनालो न।

लेखक~अभिमन्यु

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