।। युगाधार।।

|| योगेश्वर स्तुति ||

हे परमेश्वर, हे योगेश्वर हे जगत के आधार।
करो प्रणाम स्वीकार मेरा, लेखन मेरा करो स्वीकार।। 1।।
किस नाम से तुम्हें पुकारूँ, अगणित नाम तुम्हारे हैं।
गिरिधर,बनवारी,कृष्ण,कन्हैया,मुरलीधर रूप तुम्हारे हैं।। 2 ।।
देवकीनंदन,यशोदानंदन,वासुदेवसुत या हो कोई अन्य नाम।
हर रूप हो केवल तुम ही हो, आते सदैव भक्तों के काम।। 3 ।।
आर्त हों या हों अर्थार्थी, हों अथवा जिज्ञासु या ज्ञानी।
ये सब तुमको भजते हैं, महिमा तुम्हारी सबने बखानी।। 4 ।।
मैं भी इक आर्त बन कर, शरण तुम्हारी आया हूँ।
लेखनी को मेरी तुम गति दो, यह विनती करने आया हूँ।। 5 ।।
लेखन कुछ करना चाहूँ मैं, पर मति मेरी नहीं समर्थ।
लेखनी को मेरी तुम बल दो, शब्दों को दो इक सार्थक अर्थ।। 6 ।।
ना मै योगी, ना मै तपस्वी, तुम्हारे मर्म का नहीं ज्ञान।
कृपा दृष्टि जो मिले तुम्हारी, लेखन का मेरे बढ़े मान।। 7 ।।
बाल्मीकि सम नहीं तपस्या मेरी, सूर सम मेरी दृष्टि नहीं।
केवल आस तुम्हारी है, रसखान, रहीम सी भक्ति नहीं
।। 8 ।।
तुम्हारी दया से हो प्रेरित, माँ सरस्वती हों मुझ पर दयाल।
लेखन को मेरे दें नव गति, कविता को दें इक नई ताल।। 9 ।।
तुम्हारे ही सकाश से, चराचर जगत है दीप्तिमान।
तुम्हारी ही दयादृष्टी से, होते स्थापित कीर्तिमान।। 10 ।।
हे जगदीश्वर,हे परमेश्वर,हे जग के आधार। मेरा यह लेखन तुम्हे समर्पित, हे युगाधार।। 11 ।।

अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव

One Response

  1. डी. के. निवातिया 29/06/2021

Leave a Reply