गर्मी का जलवा……………….देवेश दीक्षित

पसीने से भीगे सब बाल

गर्मी से हुआ चेहरा लाल

अधर सूख गए हुआ बेहाल

जल मिले तो बने ढाल

 

गर्मी से थमी है सांस

जैसे गले में फंसी हो फांस

बाहर निकलते ही लगे है आंच

जैसे चुभा हो कोई कांच

 

हाय तौबा मच रही है

लू की थपेडें पड़ रही है

जान गर्मी से निकल रही है

वर्षा भी नहीं हो रही है

 

सूरज दादा रहम करो

हम सब के संकट हरो

तपिश को थोड़ा कम करो

सृष्टि को रक्षित करो

………………………………..

देवेश दीक्षित

Leave a Reply