दर्द………..देवेश दीक्षित

दर्द बहुत होता है दिल में

जब इंसान चक्रव्यूह रचता है

अपने ही मतलब की खातिर ये

औरों से बैर रखता है

 

नियत में खोट है

स्वभाव में रोष है

अपने से दुर्बल देख ये

उसे झुकाने में लगा है

 

वह कुछ भी द्रोह नहीं कर पाता है

शराफत के चलते बस थम जाता है

वह जिन्दगी में आगे बढ़ जाता है

आसुओं को अपने पी जाता है

 

हालात अब बिगड़ रहे हैं

इंसान सदमार्ग से भटक रहे हैं

दुख से इंसान तड़प रहे हैं

और ये अक्सर बड़बड़ा रहे हैं

 

दर्द बहुत होता है दिल में

जब इंसान चक्रव्यूह रचता है

अपने ही मतलब की खातिर ये

औरों से बैर रखता है

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देवेश दीक्षित

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