सुख दुख और घाटा मुनाफा……………देवेश दीक्षित

सुख दुख और घाटा मुनाफा

धूप छांव और प्यार घृणा

जीवन के यही दो हिस्से हैं

यही एलबेले किस्से हैं

 

इनका आना हमें है सिखाता

हमें मन से है सुदृढ़ बनाता

इनसे क्या घबराना है

दिल को क्या दुखाना है

 

जीवन की है यही परीक्षा

इसी से पता चलती है शिक्षा

कितने हम ज्ञानी हैं

कितने सहनशाली हैं

 

अदभुत है ईश्वर की लीला

मत करो धैर्य को ढीला

इससे नहीं कुछ होने वाला है

सबको ईश्वर ने ही संभाला है

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देवेश दीक्षित

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