दिल की मलिका……………..देवेश दीक्षित

दिल की मलिका हो तुम मेरी

तुम से ही मेरी शान है

तुम्हारे बिना क्या जिंदगी मेरी

एक टूटा – फूटा शमशान है

 

तुम होती जब सामने मेरे

दिल को मिलता आराम है

दूर न जाना कभी मुझसे

तुम्हें मेरा ये पैगाम है

 

तुम ही मेरी चाहत हो

तुमसे ही मेरा संसार है

तुम ही मेरी धड़कन हो

तुमसे ही मेरी शाम है

 

प्रेम से देखें एक दूजे को

हम दो जिस्म एक जान हैं

महत्व दें हम एक दूजे को

एक दूजे में बसते प्राण हैं

 

भले ही तुम जाहिर न करो

फिर भी मेरा ये अरमान है

कयामत तक तुम साथ रहो

ईश्वर से अपनी यही मांग है

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देवेश दीक्षित

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