कोई लफ्ज़ मुझे भी बता दो।

कोई लफ्ज़ मुझे भी बता दो
कहां है सुकून जरा मुझे भी जता दो

कई अरसों से बहुत परेशान हूं
कैसे कहूं कि नाज़ुक जान हूं मैं

बहुत ही अरमानों से संभाला है ख़ुद को
अब तो हूं जैसे कोई बुत हो

जरा मुझे भी कोई तसल्ली दिला दो
मुझे भी तो कोई कली दिखा दो

हर तरफ से जली हूं मैं
बिन लफ्जों के पाली हूं मैं

कोई मुझे भी तो राह दिखा दो
सब कुछ भूलना तो सिखा दो

आहिस्ता आहिस्ता सब खत्म हो गया
पल पल पर सब जत्न हो गया

कोई मुझे भी बीच भंवर से बचा लो
डूब गई हूं समुंदरो के तवंर मैं
ढूंढू कहां मैं जरा सुकूं तो दिला दो

6 Comments

  1. Tanish 27/06/2021
    • rashmidelhi 27/06/2021
  2. डी. के. निवातिया 29/06/2021
    • rashmidelhi 30/06/2021
    • rashmidelhi 02/07/2021

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